कभी छोटी से दुकान में सिम कार्ड बेचते थे OYO के संस्थापक रितेश, आज इस ट्रिक से 22 की उम्र में बने अरबपति

Inspiring Success Story of Ritesh Agarwal

ये कहावत तो आप ने सुनी ही होगी की किसी इंसान की मेहनत एक दिन जरूर रंग लाती है और अगर ये मेहनत सच्चे मन से की गयी हो तो इसका फल भी एक न एक दिन मिलता ही है। आज हमारे देश में जितने भी सफल इंसान है उसके पीछे उनकी कठोर मेहनत भी है जिसकी वजह से आज वो अपने मुकाम पर पहुंचे हैं| जितने भी Successful Businessman या कोई और इंसान हैं उसने अपने जीवन में संघर्ष जरूर किया होगा तभी आज वो अपने मुकाम तक पहुँच पाए हैं|

आज हम आपको एक ऐसे ही इंसान की कहानी बताने जा रहे हैं जो की एक समय में एक छोटे से कसबे में सिर्फ सिम बेचने का धंधा करते थे, लेकिन किसका समय कब बदल जाये ये कोई नही जानता| ऐसी ही कहानी है ओयो रूम्स के संस्थापक रितेश अग्रवाल की। जिनकी उम्र आज 23 वर्ष है और इस उम्र में लोग अपने करियर के बारे में सोचना शुरू करते हैं लेकिन रितेश ने इस उम्र में एक कंपनी खड़ी कर दी। और इस कंपनी की वजह से आज पुएई दिनिया में उनका नाम हो गया है और विदेशो में भी इनके चर्चे हो रहे हैं|

आपको बता दे की ओेयो के मालिक Ritesh Agrawal अब अपने Business का विस्तार चीन तक करने वाले हैं जिसमे इनको करोड़ो का फायेदा होगा| 6.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश फंड के मालिक मासायोशी सन ने चीन में कारोबार शुरू करने में अग्रवाल की काफी मदद की है। और आज के समय में किसी भारतीय कंज्यूमर टेक्नोलॉजी कंपनी को अपने दम पे चीन में पहुंचा पाना बहुत बड़ी बात है। रितेश की कंपनी ने शेनजेन में ऑपरेशन शुरू किया है। इसके बाद इसे 25 और शहरों में ले जाया जाएगा। चीन में उनके कर्मचारियों की संख्या लगभग 1 हजार के करीब होगी।

इस मुकाम तक पहुंचने के लिए रितेश को बहुत ही ज्यादा मेहनत करनी पड़ी और जब रितेश ने अपनी स्‍कूल की पढ़ाई पूरी कर ली तो आगे कॉलेज में प़ाई करने से मना कर दिया तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वह जल्‍द ही अरबपति बन जाएगा। किसी भी इंसान की ज़िन्दगी में कब क्या हो जायेगा ये कहा नही जा सकता किसी को ये अंदाज़ा भी नही था की ओडिसा के एक छोटे से कसबे में सिम कार्ड बेचने वाला कभी अरबपति बन जायेगा| लेकिन वो कहते हैं न की किस्मत तो ऊपर वाला लिखता है हम तो सिर्फ इसे अपनी मेहनत से पूरा करते हैं| रितेश आज दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार सॉफ्टबैंक के मासायोशी सन चीन में ओयो रूम्स की एंट्री के साथ इसका पार्टनर बनना चाहते हैं।

रितेश ने 2015 में अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि ‘क्या आपको OYO का पूरा नाम पाटा है नही न तो आपो बता दे की इसका पूरा नाम है ‘OnYour Own’ | 18 साल की उम्र में रितेश ने ओरावेल स्टे नाम की कंपनी बनाई जो सस्ते और Affordable hotels के बारे में जानकारी देती थी। इस बीच वो वैंचर नर्सरी के संपर्क में आए। इसके बाद उन्होंने 3 महीने की ट्रेनिंग की और उसके बाद उनको 30 लाख रुपए की Funding मिली। इसके बाद वो कभी पीछे मुड़कर नही देखे और आगे ही बढ़ते गए 2013 में उन्होंने ओयो की स्थापना की। उनको निवेशक मिलते गए और ओयो रूम्स आगे बढ़ती गई। महज चार साल में कंपनी बहुत तेजी से आगे बढ़ गई। रितेश के OYO Rooms में सॉफ्टबैंक ग्रुप, ग्रीनओक्‍स, सेक्‍यूइया कैपिटल और लाइटस्‍प्रेड इंडिया जैसी कंनियों ने निवेश किया है। रितेश अग्रवाल वैल्युएशन 5,800 करोड़ रुपए था।

अग्रवाल की कंपनी धीरे धीरे बहुत बड़ी हो गई, तब वे एक मात्र ड्रॉपआउट थे, जो आईआईएम के 10-12 लोगों और आईआईटी, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के करीब 200 लोगों की टीम को लीड कर रहे थे। उन्होंने कहा, “भारत में तो यह सिर्फ एक मजाक है, मैं स्मार्ट और हाईक्वालिटी वाले किसी भी ड्रॉपआउट में नहीं आया हूं। और उम्मीद है कि आने वाले समय में हमारे पास हाई-क्वालिटी वाले ड्रॉपआउट होंगे। रितेश अग्रवाल ने बिल गेट्स और ओला कैब्स के सह-संस्थापक व साथी ड्रॉपआउट 32 वर्षीय भाविश अग्रवाल से इस बारे में प्रेरणा ली।

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