आयकर विभाग ने दी पैन और टैन मामले में उद्योग जगत को बड़ी राहत

आयकर विभाग ने पैन और टैन मामले में उद्योग जगत को बड़ी राहत दी है। विभाग ने शनिवार को कहा कि कंपनी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र को कंपनियों के लिए पैन और टैन का पर्याप्त सबूत माना जाएगा। इसका मतलब है कि अब कंपनियों के लिए निगमन प्रमाणपत्र (सीओआई) को पैन व टैन का पर्याप्त सबूत माना जाएगा।

वित्त अधिनियम 2018 के तहत आयकर कानून 1961 की धारा 139ए में संशोधन किया गया है और लैमिनेटेड कार्ड के रूप में पैन जारी करने की जरूरत समाप्त कर दी गई है। इसका मतलब है कि कंपनियों को पैन नंबर तो मिल जाएगा, लेकिन उन्हें लैमिनेटेड कार्ड लेने की जरूरत नहीं होगी।

आवेदन करना भी आसान

कंपनियां कंपनी पंजीकरण गठन, स्थायी खाता संख्या (पैन) आवंटन, कर कटौती और संग्रहण खाता नंबर (टैन) आवंटन के लिए आवेदन एक ही आवेदन पत्र के जरिए कर सकती हैं। यानी, अब एक ही आवेदन करने पर ये सारे काम हो जाएंगे। विभाग का कहना है कि मंत्रालय द्वारा जारी गठन प्रमाण पत्र (सीओआई) में पैन व टैन दोनों का उल्लेख होता है।

प्रमाण के तौर पर काम करेगा

आयकर विभाग ने एक रिलीज के माध्यम से कहा कि इस प्रकार यह स्पष्ट किया जाता है कि कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी सीओआई में उल्लिखित पैन और टैन नंबर स्पष्ट तौर पर संबंधित कंपनी के लिए प्रमाण के तौर पर काम करेगा।

क्या होता है पैन और टैन

कर संग्रह को सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए आयकर विभाग की ओर से व्यक्तिगत करदाता, कंपनी और ट्रस्ट को पैन या टैन नंबर जारी किया जाता है। पैन और टैन 10 अंकों का एक नंबर है। आयकर विभाग करदाताओं की पहचान उनके स्थायी खाता संख्या यानी पैन से करता है। वहीं, टैन कार्ड को ऐसे सभी करदाता को प्राप्त करना आवश्यक है जो आयकर अधिनियम 1961 की धारा 203ए के अंतर्गत कर काटने या संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी हैं।