उपमा विरदी: एक Lawyer होते हुए भी चाय वाली के नाम से जानी जाती है

चाय National Drink Of India शायद ऐसा कहना कोई बड़ी बात नही है। सुबह उठते हि एक गरमा – गरम चाय की प्याली नही मिले तो लगता है कि लगता है कि दिन की शुरुआत अच्छी नही हुई और सुबह यह एक प्याली मिल जाए तो कहना ही क्या। भारत में तो अधिकतर लोग इसे अपनी डेली लाइफ का एक हिस्सा मानते है, और क्यों न माने हमारे सुख और दुःख में यही तो हमारे साथ होती है इसी लोकप्रिय चाय को और भी लोकप्रिय बनाया, ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली भारतीय मूल की उपमा विरदी ने, जिन्हें आज सारी दुनिया चाय वाली के नाम से जानता है।

उपमा विरदी का जन्म चंडीगड़ में हुआ था अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करने के बाद वह Low (वकालात) की पड़ाई करने ऑस्ट्रेलिया चली गयी आज 28 साल की उपमा विरदी ऑस्ट्रेलिया में एक कामयाब वकील है। पेशे से वकील उपमा विरदी अपनी नौकरी से वक्त निकलकर उपमा विरदी यह के लोगो को चाय परोसती है इनकी ‘मसाला चाय’ इतना ख़ास है कि सभी लोग पिये बिना रह ही नही पाते। ये पहली ऐसी भारतीय महिला है जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया में Coffee पसंद करने वालो को भारतीय मसाला चाय का चस्का लगाया। उपमा विरदी की इस सफलता पर Indian Australian Business And Community Awards द्वारा Business Woman Of The Year 2016 चुना गया है।

एक Successful Lawyer से सफल Business Woman तक का सफ़र

उपमा विरदी जब Law की पड़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया गयी , तब उन्हें घर की बनी चाय की बहुत याद आने लगी। चाय के लिए ये जूनून ही उन्हें ‘चाय बिसनेस’ की तरफ ले गया | चाय को बिसनेस के रूप में चुनने की एक वजह ये भी थी की वह अपने दादाजी की मसाल चाय को दुनिया में पहचान दिलाना चाहती थी , उपमा विरदी के दादाजी चंडीगड़ में आयुर्वेदिक दवाई बेचते है , वो अपनी डिस्पेंसरी में आयुर्वेदिक चाय बनाया करते थे इनके दादा जड़ी बूटियो और मसालों के विशेषज्ञ थे और उपमा विरदी की प्रेरणा भी। बस यही पर उपमा विरदी ने दादाजी से मसाला चाय बनाना सिखा।

उपमा विरदी का कहना था की Lawyer से चाय वाली Business Woman तक का सफ़र आसान नहीं था। उपमा विरदी का चाय का Business शुरू करने का Idea उनके मम्मी-पापा को पसंद कभी भी नही आया | लेकिन उपमा विरदी को चाय का इतना शौक था कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में चाय की एक दुकान खोल ली। अपनी नौकरी से बचे समय में चाय वाली बनकर ऑफिस में चाय देने पहुच जाती थी | हाथ में तार से बनी टोकरी में चाय के गिलास लेकर चाय-चाय का आवाज़ लगाती जब ऑफिस में घुसती है तो लोग हाथो हाथ उनकी चाय ले लेते। आज इनके हाथो का बना चाय इतना पसंद किया जा रहा है कि “चाय वाली उपमा विरदी” के नाम से एक ब्रांड तैयार हो गया है और उनकी चाय ऑस्ट्रेलिया के बाज़ार में खूब धडल्ले के साथ बिक रही है।

चाय के प्रति उपमा विरदी के Passion की वजह से ऑस्ट्रेलिया में हुए ‘Tea Festival’ में इन्हें विशेष तौर पर बुलाया गया। इस Festival में उपमा विरदी सिर्फ शामिल ही नही हुई बल्कि उन्होंने भारतीय चाय की तारीफ करते हुए कहा कि “मै ऑस्ट्रेलिया के लोगो को बताना चाहती हूँ कि भारतीय चाय का स्वाद दुनिया के बाक़ी देश की चाय से अलग है , क्योकि भारतीय चाय को स्वादिष्ट बनाने के लिए हम उसमे इलायची, लोंग और कई तरह की बूटियों का प्रयोग करते है”।

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सफलता किसी की मिह्ताज़ नही होती , बल्कि सफलता उनके कदम चूमती है जिनके हौसले में जान होती है। उपमा विरदीने चाय को Business की तौर पर अपनाते हुए अपनी सफलता की कहानी तो लिखी ही साथ ही एक मिसाल भी कायम कर दी। इन्होने यह साबित कर दिया कि “कोई भी काम छोटा या बड़ा नही होता” है।

क्या मकसद था चाय का Business चुनने का

उपमा विरदी का मकसद ऑस्ट्रेलियन समाज को चाय के जरिये भारतीय संस्कृति से रूबरू करवाना था। उपमा विरदी के हाथो की बनी चाय ऑस्टेलिया के लोग काफी पसंद करते है। उपमा विरदी कहती है की एक दिन ऐसा आएगा की लोग Coffee के बजाए चाय पीना ज्यादा पसंद करेंगे। वो अपनी चाय को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाने के लिए रेस्टोरेंट ,शौपिंग मोल्स , कैफे और होटलों में चाय को मशहूर बना रही है , लोगो को चाय इतनी पसंद आ रही है कि वे इसे बनाने का तरीका भी सिख रहे है। इसके लिए उपमा विरदी अलग-अलग शहरो में जाकर ‘The Art Of Making Chai’ वर्कशॉप यानी चाय बनाने की कला के बारे में Class लेती है। जिसमे उपमा विरदी लोगो को स्वादिष्ट मसाला चाय बनाना सिखाती है। आज उपमा विरदीने

Business में जो मुकाम हासिल किया है उसे बस में यही कहना चाहूंगी –

“जिंदगी में आगे बड़ने के लिए कम छोटा हो या बड़ा बस मन चाहिए ,
हर रह आसान हो जायेगी बस उसे करने के लिए द्रणसंकल्प चाहिए”।

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