Tester क्या है टेस्टर से बिजली का झटका क्यों नहीं लगता

टेस्टर से चेक करने पर नहीं लगता बिजली का झटका, क्यों और कैसे जानिए पूरी बात

जीवन में अक्सर आपके साथ में बिजली का झटका लगने जैसी घटना हुई होगी. आपने भी बिजली के तेज झटके का अनुभव कभी न कभी किया होगा. यह बिजली का झटका इतना ज्यादा खतरनाक होता है, कि यह किसी व्यक्ति की जान तक ले सकता हैं. पर आखिर बिजली का झटका इतना खतरनाक कैसे होता हैं. लेकिन उससे पहले यह जानना जरुरी है कि आखिर करंट होता क्या हैं. तो आपको बता दे कि Electron के Flow को करंट कहा जाता है. इन्ही इलेक्ट्रोन के माध्यम से करंट नेगेटिव से Positive Point की ओर फ्लो करता हैं.

आप यह तो समझ गए कि हमारे घर में मौजूद हर Device के अन्दर अलग तरह का करंट फ्लो करता हैं. अर्थात किसी भी Electronic Device को चलाने के लिए उसमे इलेक्ट्रोन का फ्लो होना आवश्यक हैं. अब आप करंट के बारे में तो समझ गए होंगे, कि आखिर करंट होता क्या हैं? लेकिन अब आपका यह जानना भी जरूरी है कि आखिर करंट कितने प्रकार के होते हैं? उससे पहले हम यह जानेंगे कि अगर हम अपने हाथों से बिजली को टेस्ट करते है तो, हमें जोर का झटका लगता हैं.

लेकिन अगर हम टेस्टर के माध्यम से बिजली को चेक करते है, तो हमें झटका नहीं लगता. ऐसा आखिर क्यों होता हैं? किस कारण हाथ से बिजली को चेक करने पर झटका लगता है, लेकिन Tester से बिजली को चेक करने पर झटका नहीं लगता? आइये जानते है, इसके पीछे का कारण.

टेस्टर से क्यों नहीं लगता झटका

जैसा की हम सब जानते है,कि बिजली का झटका लगने का मुख्य कारण होता है, हमारें शरीर का बिजली के झटके को सहन न कर पाना. सीधे शब्दों में कहा जाये तो हमारा शरीर 9 Volt तक बिजली के प्रवाह को सहन कर सकता हैं. ऐसे में जब हम Tester की बनावट को अन्दर से खोलकर देखते हैं, तो हम पाते हैं कि इसमें एक प्रतिरोध लगा हुआ होता है, जो पेचकस के ब्लेंड के साथ में जुडा रहता हैं.

वहीं इसके दूसरी ओर एक नियान लैप भी लगा होता हैं, तथा इसमें एक स्प्रिंग भी लगी होती हैं. जब हम बिजली के फेज में Tester को लगाते है तो, करंट हमारे हाथ तक पहुंचने से पहले प्रतिरोध से होकर गुजरता हैं. टेस्टर में मौजूद यह प्रतिरोध इनता ज्यादा होता है कि यह घरों में मौजूद 220 वोल्ट की बिजली को 4 से 5 वोल्ट में परिवर्तित कर देता है. जैसा की हमने आपको बताया है कि मनुष्य का शरीर 9 वोल्ट तक की बिजली के झटके को सहन कर लेता हैं. जिससे हमें टेस्टर से बिजली को टेस्ट करने पर करंट का झटका नहीं लगता.

इसी के साथ फेज और हमारे हाथ द्वारा दिए गए न्यूट्रल से परिपथ पूर्ण होने के चलते, टेस्टर में लाईट जलने लगती हैं. अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे हो सकता हैं? तो आपको बता दे की इस प्रक्रिया में ओम का नियम ही लागू होता हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि टेस्टर से बिजली का झटका न लगने के पीछे ओम का नियम कैसे हो सकता है? इसी के साथ सवाल उठता है, कि आखिर ओम का नियम क्या है? तो आने वाले बिंदु में हम ओम का नियम समझेंगे.

क्या कहता है ओम का नियम

ओम के नियम अनुसार एक नियत ताप पर, एक चालक से गुजरने वाली धारा चालक पर विभवान्तर के सीधे समानुपाती होती हैं. इसी के अनुसार जब हम बिजली को चेक करते समय Tester का उपयोग करते हैं, तो टेस्टर के अंदर मौजूद प्रतिरोध बिजली के सप्लाई के विपरीत दबाव बनाता है, यह प्रतिरोध इतना ज्यादा होता है, कि घर का बिजली का 220 वोल्ट का बिजली का सप्लाई 5 वोल्ट में बदल जाता है. जिसके चलते हमें बिजली का झटका नहीं लगता.

आशा है, आपको यह बात समझ में आई होगी कि ओम का नियम किस तरह से कार्य करता हैं. अब आपका यह जानना जरूरी है कि आखिर करंट कितने प्रकार के होते हैं. उसी के अनुसार आप टेस्टर से बिजली का झटका न लगने की बात को पूरी तरह समझ सकेंगे. तो आइए जानते है कि करंट कितने प्रकार के होते हैं.

करंट के प्रकार

आपको बता दे कि करंट दो प्रकार के होते है, एक होता है डायरेक्ट करंट और दूसरा अल्टरनेट करंट. दोनों ही करंट एक दूसरे से बिलकुल विपरीत होते है. जिनका उपयोग भी अलग-अलग होता हैं. पहले बात करते है, अल्टरनेटिव करंट की. तो यह करंट सीधे फ्लो नहीं होता, बल्कि यह करंट साइन वेव में फ्लो होता हैं. यानि की इसमें इलेक्ट्रोन साइन वेव में फ्लो होते हैं. किसी भी सर्किट में अल्टरनेटिव करंट (Alternative current) एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक साइन वेव में फ्लो होता हैं. यह प्रक्रिया डायरेक्ट करंट के बिलकुल ही विपरीत होती हैं.

अब हम बात करेंगे डायरेक्ट करंट की. तो आपको बता दे कि डायरेक्ट करंट अल्टरनेटिव करंट के बिलकुल विपरीत होता हैं. इसमें करंट एक बिंदु से सीधे दूसरे बिंदु पर फ्लो होता हैं. जबकि अल्टरनेट करंट सर्किट में एक बिंदु से दूसरी बिंदु तक ऊपर-निचे फ्लो होता हैं. अगर आप डायरेक्ट करंट को सरल उदहारण के रूप में समझना चाहते है तो आप बेटरी की संरचना को समझ सकते हैं.

टेस्टर से चैक करना कितना सुरक्षित

जैसा की हमने आपको ऊपर बताया की करंट अलग-अलग प्रकार के होते हैं. तथा उन करंट का प्रयोग भी अलग-अलग तरह से होता हैं. अब हम बात करते हैं कि क्या टेस्टर से करंट को चेक करना सही हैं. जैसा की हमने आपको बताया टेस्टर के अन्दर मौजूद प्रतिरोध के चलते घर की बिजली का सप्लाई 220 वोल्ट से 5 वोल्ट तक आ जाता है, जिससे हमें बिजली का झटका नहीं लगता और टेस्टर की लाईट जल जाती हैं.

लेकिन यह केवल इसलिए होता है कि हमारें घरों में अल्टरनेटिव करंट का प्रयोग किया जाता हैं. जिससे टेस्टर इसे कम वोल्ट में आसानी से परिवर्तित कर देता हैं. यही कारण ही की हमे बिजली का झटका नहीं लगता. वहीं डायरेक्ट करंट को टेस्टर से चेक करना इतना सुरक्षित नहीं हैं. क्योकि उसमे वोल्टेज काफी ज्यादा हाई होता हैं. ऐसे में हाई वोल्टेज को टेस्टर से चेक करने में कही अपका टेस्टर ही फाल्ट न हो जाए. तथा आप बिजली के तेज झटके का शिकार न हो जाए.

उम्मीद है कि आपको करंट से जुडी सारी जानकारी समझ में आई होगी. लेकिन आगर आप हमारी बात माने तो बिजली से जुड़ा कोई भी कार अपने द्वारा न करते हुए, किसी लाईटमेन को बुलाकर ही कराए. क्योकि उन्हें बिजली के झटके से जुडी सारी सावधानियों के बारे में पता होता हैं. क्योकि अगर आप बिजली से जुडी कोई भी टेस्टिंग खुद करने का प्रयास करते है, तो इसमें जान का जोखिम भी हो सकता हैं.

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